'काँपते होढ़ो के ओ पहले शब्द....
अपने मे ही सिमट जाने को बेताब सी तुम......
हजारो सवालों और जवाब से जूझता तुम्हारा मन...
अनगिनत धड़कनों को समेटने की कोशिश करता तुम्हारा दिल.....
खुले आशमा के निचे हजारों तारो के बीच दो अकेली कुर्सीयो का लगा देना....
और दो अजनबी जो अपने ना जाने क़ितने सपने क़ितने अरमान और अपनी तकदीर के फेसले कुछ शब्दो मे करने के लिए बिठा दिए गए थे....
......और आज ये लगता है नियति ने तुम्हे मेरे लिए बनाया... ओर आज ..
Please use headphones 🎧
and feel it...
.....27 मार्च 2022
8:50 PM
Thank you
Love you ....❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️