रविवार, 21 सितंबर 2025

तुम्हारी बरगद की छांव में ....

~ तुम्हारी बरगद की छांव में  आज भी"Quot Rami Tot Arbores"इलाहबाद विश्वविद्यालय के इस ध्येय वाक्य में ही इसकी जीवंतता इसका इतिहास इसकी प्राचीनता और मानवीय सभ्यता के विकाश में इसके योगदान का प्रतिबिंब है लैटिन भाषा के इस वाक्यांश का अर्थ ("Every branch yields a Tree") अपने आप में इसके अमर अस्तित्व को बताता है जो की कहता है की मेरी हर एक शाख़ अपने आप में एक वृक्ष है इस के ये शाख़ हम आप जैसे हजारो छात्र -छात्राये है और जब तक हम अपने आचरण में विश्विद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास को बनाये रखेगे प्रयाग की पुण्य धरा पर ज्ञान और प्रेम का यह वट अक्षय रहेगा।। "स्थापना के 131 वर्ष पूरे होने पर "
इलाहाबाद आया हूं तो वहां   जाना तो था ही  आज शाम विश्व विद्यालय कैंपस में बैठा यह सोच रहा था कि तुम प्रयाग की धरती पर किसी बहुत महान इंसान जैसे लगते हो मुझे कभी कभी , पापा की बातों में तुम समुद्र और तुम्हारी बाकी शाखाएं नदी है ! तुमने मुझे और मुझ जैसे करोड़ो लोगो को जाने कितना कुछ दिया है जिसका अंदाजा उंगलियो पर गिनकर नही किया जा सकता ! अमृता जी की भाषा में लिखूँ तो तुम्हारे साये में गुजरे दिन अगर  उंगलियों पर गिनता हूं तो उंगलियां अच्छी लगने लगती है मुझे ! 

तुमको पता है ! तुमने जीवन जीने के सलीके के साथ साथ कठिन परिस्थितियों से लड़ना भी सीखाया मुझे , हर वक़्त गूँजती हंसी की खनक भी तो तुममे ही सीखी थी ! मुगली बनावट वाले बड़े बड़े बरामदों में जब भी लड़कियों का अपनी सहेलियों के साथ  खिलखिलाकर  कर हँसती न यकीन मानो तुम्हारा एक एक कोना खुशियो से भरा लगता ! 
तुम हो तो जिंदगी गुलज़ार है ! 

पहले पहल सोचा  करता था करता था  कि बच्चन जी अंग्रेजी के प्रोफेसर होने के बाद भी हिन्दी के महानतम कवि कैसे हुए ? फिर तुम्हारी फ़िज़ा की याद आई तो  समझ गया   तुम्हारे तो रग रग में प्रेम है ! जिसको जिससे प्रेम हुआ तो उसी में रम गया !

यकीन मानो जितना सुकून तुम्हारी हरी घास वाली छाओ में आता है न उतना दुनिया के किसी कोने में नही है ! मेरा मन आज भी भागकर उस हरी घास वाले छांव में चला जाता है ! अंग्रेजी विभाग की सोपान फ़लख पर बैठी जैसे किसी शायर सा महसूस  करता  हूँ खुद को ! कैंटीन की भीड़भाड़ वाले रास्तों पर चलने से जहां अब भी   मुश्किल है  ,वही सीनेट हाल को चेंननुमा घेरते हुए बनी रंगोली को अपने आप को अभिभूत करने जैसा था

महिला छात्रावास परिसर में बने वो सारे हॉस्टल की दीवारें तुमसे ही तो प्रेरित होती है ! रेड बिल्डिंग के वो भूतिया क़िस्से कहाँ तक सच है मुझे नही पता लेकिन वो मेरे आकर्षण का केंद्र हमेशा रहा !

प्रोफेसर्स की डाँट किसी मीठी गोली सरीखी लगती  ! 
मानो जिंदगी यही से शुरू हो और यही आकर खत्म हो ! दुनियां जहां से बेखबर ! बरगद की छाँव जैसे घर का आँगन हो और बगिया के फूल मानो गाँव की गलियाँ! लाल , गुलाबी, हरे, बैंगनी , कत्थई और काहि हर रंग में तुम पूर्ण हो ! तुम्हारी वो जन्म जन्मांतर से रुकी हुई घड़ी जिसकी सुईयां दिन में एक बार सही वक़्त जरूर बताती है ! 

तुम कितनी विविधता को अपने में समेटे हुए हो ! कोई फोटोग्राफर है तो कोई ग्रेस से पास होता है , कोई नेता है तो कोई देवर बना घूम रहा, कोई बड़ी पोस्ट वाला अधिकारी बन गया तो कोई आज भी कैम्पस में बकैती झाड़ रहा , पर तुम्हारे लिए सबके दिल में प्रेम एकसमान !

जानते हो !  अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत 5 साल मैंने तुममे बिताये है ! तुम्हारी एक एक दरो-दीवार पे नाज है मुझे ! तुम मेरे दूसरे घर जैसे हो ! मानो तुम मुस्कान हो मेरी ! मेरी जिंदगी की एक एक सोपान फ़लख में तुम्हारा शुक्रिया !  ! 

तुम्हारी बरगद की छांव में ....

~ तुम्हारी बरगद की छांव में  आज भी"Quot Rami Tot Arbores"इलाहबाद विश्वविद्यालय के इस ध्येय वाक्य में ही इसकी जीवंतता इ...